दुर्गेश साहू धमतरी। जिले के एक प्रमुख कार्यालय में इन दिनों माहौल सामान्य नहीं है। नए अधिकारी के पदभार संभालने के बाद से ही जनता और विभागीय कर्मचारियों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। हालात इस कदर हैं कि लोग खुले तौर पर तो कुछ नहीं कहते, लेकिन हर बातचीत में एक ही बात सुनाई देती है सीनियर से नाराज़गी, जूनियर की याद। लोगों का कहना है कि जिले में पहले जो अधिकारी थे, वे व्यवहार में सरल, उपलब्ध और समाधान केंद्रित थे। सप्ताह में एक दिन जनदर्शन होता था, आम जनता बेझिझक पहुँचती थी और समस्याओं का तत्काल समाधान भी मिलता था। लोग बिना डर के अपनी बात रखते थे और अधिकारी उसे गंभीरता से सुनते भी थे।

लेकिन अब, लोगों का मौखिक आरोप है कि नया अधिकारी न तो बात ठीक से सुनता है, न समस्या को समय देता है, और न ही स्पष्ट उत्तर देता है। जिस विभाग की छवि पहले सहज और पारदर्शी मानी जाती थी, वहीं अब लोग कहते हैं कि छोटी-सी बात पर भी माहौल तनावपूर्ण लगता है। कई बार विभाग पर सवाल उठने पर गोल-मोल जवाब दिए जाते हैं और विभाग की बदनामी का डर ज़्यादा महसूस कराया जाता है। अन्य कुछ लोगों का कहना है कि पहले जिस अधिकारी को जूनियर बताते हैं, वही व्यवहार और कामकाज में कहीं ज़्यादा मजबूत थे। अब जो अधिकारी खुद को सीनियर मानते हैं, उनके सामने छोटे अधिकारी और कर्मचारी जाने से भी कतराते हैं। कई कर्मचारी बताते हैं कि बातचीत का अंदाज़ इतना सख्त है कि सामान्य काम भी दबाव जैसा महसूस होने लगा है। विभाग में एक और असंतोष यह है कि बड़ी जिम्मेदारियाँ उन छोटे कर्मचारियों को दी जा रही हैं जिनकी क्षमता के दायरे में वह काम नहीं आता, जबकि विभाग में बड़े अधिकारी मौजूद हैं। इससे स्टाफ में रोष बढ़ता जा रहा है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि विभाग के कई कर्मचारी अपने ही ट्रांसफर करवाने की कोशिश में लगे हुए हैं। माहौल इतना असहज बताया जा रहा है कि जैसे ही अधिकारी का ट्रांसफर की कोई अफवाह उठती है, विभाग के कई चेहरों पर मुस्कुराहट आ जाती है। पहली दो ट्रांसफर सूची आने के बाद भी बदलाव की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। अब तीसरी सूची का इंतज़ार बढ़ रहा है और लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या इस बार विभाग में राहत मिलेगी या फिर सब पहले जैसा ही रहेगा। कुल मिलाकर, विभाग में कथित सीनियर अधिकारी के प्रति नाराज़गी, व्यवहार संबंधी शिकायतें, गलत जिम्मेदारी बंटवारा और ट्रांसफर की बढ़ती हलचल ने माहौल को भारी और तनावपूर्ण बना दिया है। जनता और कर्मचारी दोनों की एक ही राय है 

पहले वाले जूनियर थे, लेकिन काम और व्यवहार में वही असली सीनियर साबित हुए।