दुर्गेश साहू धमतरी। कहा जाता है कि ईश्वर सब देख रहा है उसकी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता और न ही उसके न्याय से भगवान के विराट स्वरूप में संपूर्ण अनंत ब्रह्मांड समाया हुआ है वही विराट रूप भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र से पूर्व दिखाया था आने वाली 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर दही-हांडी और मटकी फोड़ कार्यक्रम कराने की नगर निगम की पहल अच्छी है। कार्यक्रम नगर निगम कराए या सामाजिक संगठन, आयोजन भव्य हो और शहर के लोग मिल-जुलकर इसमें शामिल हों, यही सबसे अहम बात है। लेकिन इस पूरे मामले में आपसी समन्वय की कमी अब चर्चा का विषय बन गई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व प्रेम, एकता, भाईचारे और मिल-जुलकर उत्सव मनाने का संदेश देता है। ऐसे में एक ही कार्यक्रम को लेकर शहर में अलग-अलग तस्वीर सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोगों का कहना है कि आयोजन किसी का भी हो, लेकिन उसका संदेश जिले में सकारात्मक जाना चाहिए। मौजूदा स्थिति यदि समय रहते नहीं संभली तो यह मामला किसी बड़ी घटना या विवाद का रूप भी ले सकता है।
आखिर जिम्मेदारों की चुप्पी क्यों
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारों की चुप्पी को लेकर भी उठ रहा है। जब शहर में एक ही आयोजन को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हों और सोशल मीडिया पर भी माहौल बन रहा हो, तब समय रहते सभी पक्षों को बैठाकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस की जा रही है। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि नगर निगम में भाजपा की सरकार है। भाजपा लगातार संगठन की एकता, आपसी समन्वय और मिलकर काम करने का संदेश देती है। ऐसे में एक ही विचारधारा से जुड़े लोगों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के एक कार्यक्रम को लेकर ऐसी स्थिति बनना अपने आप में चर्चा का विषय है। सवाल यह नहीं कि कार्यक्रम कौन कराएगा, सवाल यह है कि एक ही उद्देश्य के लिए दो अलग-अलग तस्वीर क्यों बन रही है?
क्या आयोजन की रूपरेखा बनाई जा सकती थी?
धमतरी में वर्षों से सामाजिक संगठनों और शहर के युवाओं की भागीदारी से दही-हांडी का आयोजन होता रहा है। यदि नगर निगम इस परंपरा को व्यापक स्वरूप देना चाहता है तो यह पहल स्वागत योग्य है। लेकिन पहले से आयोजन करते आ रहे संगठन और युवाओं के साथ बैठकर एक साझा आयोजन की रूपरेखा बनाई जा सकती थी। इससे निगम की पहल भी बनी रहती और वर्षों से चली आ रही परंपरा भी आगे बढ़ती। अब भी रास्ता बंद नहीं हुआ है। नगर निगम और संगठन दोनों चाहें तो आपसी बातचीत और समन्वय से एक साथ यह आयोजन कर सकते हैं। इससे शहर में एकता का संदेश जाएगा और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मूल भावना भी कायम रहेगी। आखिर आयोजन मटकी फोड़ने का है, दिलों में दूरी बढ़ाने का नहीं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि जिम्मेदार समय रहते पहल करें, सभी पक्ष साथ बैठें और ऐसा रास्ता निकालें जिससे जन्माष्टमी पर धमतरी से पूरे जिले में प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश जाए।
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