दुर्गेश साहू धमतरी। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में गौचारण लीला का विशेष महत्व माना जाता है। गायों की सेवा और देखभाल के कारण उन्हें गोपाल और गोविंद के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन धमतरी में जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ कार्यक्रम को लेकर नगर निगम की सक्रियता के बीच शहर की सड़कों पर मवेशियों की समस्या चर्चा में है। सवाल यह नहीं कि धार्मिक आयोजन क्यों हो रहा है, बल्कि यह है कि आयोजन के साथ शहर की बुनियादी समस्याओं पर भी उतना ही ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? शहर की कई प्रमुख सड़कों पर रोज बड़ी संख्या में मवेशी बैठे या घूमते नजर आते हैं। कई जगह स्थिति ऐसी रहती है कि सड़क वाहनों के लिए कम और मवेशियों के बैठने की जगह अधिक नजर आती है। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार सड़क पर मवेशियों के कारण हादसे होने की बातें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद मवेशी मालिकों पर कार्रवाई की बात तो होती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नजर नहीं आता। ऐसे में सवाल है कि निगम आखिर सड़कों से मवेशियों को हटाने और पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर प्रभावी कार्रवाई कब करेगा?
मटकी फोड़ की तैयारी, लेकिन मूल समस्याएं जस की तस
इसी बीच नगर निगम द्वारा घड़ी चौक में मटकी फोड़ कार्यक्रम कराने की तैयारी ने शहर में नई चर्चा छेड़ दी है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन निश्चित तौर पर शहर में उत्साह का माहौल बनाते हैं, लेकिन नागरिकों का सवाल है कि जब सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और मवेशियों जैसी समस्याएं लगातार सामने हैं, तो निगम की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दही-हांडी और मटकी फोड़ आयोजन को लेकर शहर में अलग-अलग संगठनों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कोई निगम की पहल के समर्थन में है तो कोई वर्षों से आयोजन करते आ रहे श्रीराम हिंदू संगठन की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है। हर पक्ष अपने तर्क के साथ आयोजन को लेकर सक्रिय है। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब धार्मिक आयोजन को लेकर इतने बयान और गतिविधियां सामने आ रही हैं, तो शहर की सड़कों पर बैठे मवेशियों को लेकर संगठनों और जिम्मेदार लोगों की आवाज उतनी मुखर क्यों नहीं दिखाई देती?
घड़ी चौक पर मटकी फोड़ की तैयारी, उसी चौक की घड़ी पर खर्च के बाद भी सवाल
घड़ी चौक इस समय दही-हांडी और मटकी फोड़ आयोजन को लेकर चर्चा में है। इसी स्थान पर वर्षों से श्रीराम हिंदू संगठन और शहर के युवा आयोजन करते आए हैं, ज्ञात हो इस बार नगर निगम भी यहीं मटकी फोड़ कार्यक्रम कराने की तैयारी में है। ऐसे में इसी चौक की घड़ी की मरम्मत का मामला भी सवालों के घेरे में है। करीब 50 हजार रुपये की मरम्मत के बाद भी घड़ी की चारों दिशाओं में अलग-अलग समय दिखाई देने और अंक स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आ रही है। जिस स्थान को शहर के प्रमुख आयोजन स्थल के रूप में चुना जा रहा है, वहां खर्च के बाद भी घड़ी की स्थिति संतोषजनक नहीं होने की बात सामने आए तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि करीब 50 हजार रुपये की मरम्मत में क्या-क्या काम कराया गया, उसकी गुणवत्ता की जांच किसने की और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय हुई? और इसी के साथ बड़ा सवाल यह भी है कि जिस घड़ी चौक की व्यवस्था और रखरखाव को लेकर सवाल बने हुए हैं, उसी जगह बड़े आयोजन की तैयारी से पहले निगम इन मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त क्यों नहीं कर रहा?
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