एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत मुक्तिधाम में हुआ बरगद पौधरोपण
संजय देवांगन धमतरी। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत शहर के हटकेशर वार्ड के मुक्तिधाम में सावन माह के दूसरे सोमवार को बरगद के पौधों का रोपण किया गया इस अवसर पर मुक्तिधाम सेवा समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बरगद के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया
बरगद के वृक्ष को भारतीय संस्कृति और परंपरा में देव तुल्य माना जाता है यह वृक्ष न केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। बरगद का पेड़ लंबे समय तक जीवित रहता है और अपने विशाल स्वरूप के कारण आसपास के वातावरण को हराभरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी मां की स्मृति में पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए मुक्तिधाम सेवा समिति द्वारा बरगद के पौधों लक्ष्मी नारायण साहू द्वारा रोपण किया गया समिति के सदस्यों ने कहा कि केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी नियमित देखभाल और सुरक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है
इस दौरान मुक्तिधाम सेवा समिति के अध्यक्ष उगेश बंशोर एवं कोषाध्यक्ष गिरधर देवांगन सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पौधरोपण में सहभागिता निभाई सभी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने का संदेश दिया
पौधरोपण कार्यक्रम में शांतिलाल देवांगन, देशराम ध्रुव, प्रहलाद निषाद, पुरुषोत्तम दीमर, देवेंद्र निर्मलकर, सुखराम यादव, माणिक साहु, सालिक राम साहु, ईश्वर पटेल, विनोद पटेल, नरेश साहु, चैन सिंह साहू, गेंदुराम साहू, इंद्रजीत निर्मलकर, नारायण देवांगन सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि मुक्तिधाम जैसे स्थानों पर अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने से आने वाले वर्षों में यहां हरियाली बढ़ेगी और वातावरण भी बेहतर होगा। समिति द्वारा भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्य किए जाने की बात कही गई
इस अवसर पर सभी ने एकजुट होकर “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और पौधों की देखभाल करने का संकल्प लिया



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