दुर्गेश साहू धमतरी। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। अंबेडकर चौक के पास सड़क स्वीकृति पर युवा मोर्चा ने महापौर रामू रोहरा का मिठाई खिलाकर स्वागत किया। इस दौरान महापौर ने शहर की सड़कों पर गड्ढों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गड्ढा करना कांग्रेस का काम है और पाटना हमारा काम है, हम पाटेंगे। महापौर के इस बयान पर पूर्व महापौर विजय देवांगन ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में सड़कों की मरम्मत के बजाय पाइपलाइन के लिए बार-बार सड़कें खोदी गईं और खुदाई के बाद उन्हें ठीक नहीं किया गया। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत कराई जाती थी, जबकि वर्तमान व्यवस्था में मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विजय देवांगन ने कहा कि भाजपा सरकार ने नलियों के लिए सड़कें खोदकर गड्ढे करने का काम किया है। पाइप खोलकर छोड़ दिए गए और पूरे शहर की स्थिति खराब हो गई। एक-दो साल से ठीक से रिपेयरिंग नहीं हुई है। अपने समय में हम पाइपलाइनों की मरम्मत कराते थे और यही व्यवस्था सड़क की स्थिति बनाए रखने में भी मदद करती थी। उन्होंने महापौर के कांग्रेस पर लगाए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शहर के भीतर गड्ढों को लेकर ऐसी शिकायत नहीं थी। उनके अनुसार स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे से संबंधित शिकायतें अलग विषय थीं, लेकिन नगर निगम क्षेत्र की सड़कों को लेकर ऐसी स्थिति नहीं थी।
      डेढ़ साल के कार्यकाल पर भी उठाए सवाल
पूर्व महापौर ने कहा कि भाजपा को नगर निगम की सत्ता संभाले करीब डेढ़ साल हो चुका है और अब पुराने गड्ढों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा निगम अब तक सड़कों की स्थिति सुधारने में अपेक्षित काम नहीं कर पाया है। वहीं, शहर की मौजूदा स्थिति में कई मार्गों पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। बारिश के दौरान इनमें पानी भरने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाती है। सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के लिए नई स्वीकृतियां मिलने के बाद अब निगम बारिश के बाद काम शुरू करने की बात कह रहा है। सियासी बयानबाजी के बीच असली सवाल शहरवासियों का है। गड्ढे पुराने हों या नई खुदाई से बने हों, सड़क पर परेशानी जनता को ही उठानी पड़ रही है। अब सड़क स्वीकृतियों के बाद देखना होगा कि निगम इन दावों और आरोपों से आगे बढ़कर सड़कों की हालत कब तक सुधार पाता है।