संजय देवांगन धमतरी। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इन दिनों धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। जिले के कई खेतों में गोल्डन धान की फसल की पत्तियां पीली पड़ने की समस्या सामने आ रही है। खेतों में जहां कुछ समय पहले तक धान की फसल हरी-भरी नजर आ रही थी, वहीं अब कई पौधों की पत्तियों में पीलापन दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर पत्तियां सूखती हुई भी नजर आ रही हैं
किसानों का कहना है कि धान की फसल में इस तरह का पीलापन दिखाई देने के बाद उन्हें फसल की वृद्धि, गुणवत्ता और संभावित पैदावार को लेकर चिंता सताने लगी है। किसानों के लिए धान की फसल केवल एक फसल नहीं, बल्कि उनकी सालभर की मेहनत और आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में फसल में किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति सामने आने पर किसान चिंतित होना स्वाभाविक है
खेतों में साफ दिखाई दे रहा पीलापन
प्रभावित खेतों की तस्वीरों में भी धान के पौधों की कई पत्तियों पर पीलापन साफ दिखाई दे रहा है। हरे पौधों के बीच पीली पत्तियां दूर से ही नजर आ रही हैं। कहीं-कहीं पौधों की निचली पत्तियों में अधिक पीलापन दिखाई दे रहा है, तो कुछ जगहों पर पत्तियों का रंग सामान्य हरे रंग की अपेक्षा हल्का नजर आ रहा है
किसानों के मुताबिक, यदि समय रहते इस समस्या का कारण पता नहीं चला और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इसका असर आगे चलकर फसल की स्थिति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि किसान अब कृषि विशेषज्ञों और कृषि विभाग की सलाह की ओर देख रहे हैं।
आखिर धान की पत्तियां पीली क्यों पड़ रही हैं?
धान की पत्तियों में पीलापन आने के पीछे एक ही कारण होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग खेतों में मिट्टी, पानी, खाद, मौसम, फसल की अवस्था और कीट-रोग की स्थिति के अनुसार कारण अलग हो सकता है
पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से नाइट्रोजन जैसे तत्वों की कमी होने पर भी पत्तियों में पीलापन दिखाई दे सकता है। इसके अलावा खेत में पानी का अत्यधिक जमाव या पानी की कमी, जड़ों से जुड़ी समस्या, मिट्टी की स्थिति, मौसम में बदलाव तथा कुछ रोग या कीटों का प्रकोप भी धान की पत्तियों के रंग में बदलाव का कारण बन सकता है।
हालांकि केवल पत्तियों का रंग देखकर किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। वास्तविक कारण की पुष्टि खेत का निरीक्षण और पौधों की स्थिति का परीक्षण करने के बाद ही की जा सकती है।
किसानों को सही सलाह की जरूरत
किसानों का कहना है कि बाजार में अलग-अलग प्रकार की दवाइयां और कृषि उत्पाद उपलब्ध हैं, लेकिन बिना समस्या की सही पहचान किए किसी भी दवा या खाद का उपयोग करना किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए किसानों की मांग है कि कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ प्रभावित खेतों का निरीक्षण करें और समस्या के वास्तविक कारण की पहचान करें
किसानों को यह भी बताया जाए कि फसल की वर्तमान अवस्था में कौन-सी खाद की आवश्यकता है, पानी का प्रबंधन किस तरह किया जाए और यदि किसी रोग या कीट का प्रकोप है तो उसके लिए कौन-सा सुरक्षित एवं अनुशंसित उपचार अपनाया जाए
समय पर पहचान जरूरी
किसानों का कहना है कि धान की फसल में किसी भी प्रकार की समस्या को शुरुआती अवस्था में पहचान लिया जाए तो उसका प्रबंधन करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। लेकिन यदि समस्या बढ़ती गई और समय पर उचित जानकारी नहीं मिली तो इसका असर फसल की स्थिति और उत्पादन पर पड़ सकता है
इसलिए किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि गांव-गांव और खेत-खेत जाकर फसल की स्थिति का निरीक्षण किया जाए। खासकर जिन खेतों में गोल्डन धान की पत्तियां अधिक संख्या में पीली पड़ रही हैं, वहां विशेषज्ञों की टीम पहुंचकर किसानों को मौके पर ही उचित मार्गदर्शन दे।
किसानों ने कृषि विभाग से की जांच की मांग
गोल्डन धान की फसल में दिखाई दे रहे पीलापन को लेकर किसानों में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इसकी वास्तविक वजह क्या है और इससे फसल को कितना नुकसान हो सकता है। किसान चाहते हैं कि विभाग जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे, ताकि किसान बिना जानकारी के अलग-अलग दवाइयों का प्रयोग करने से बच सकें।
किसानों ने मांग की है कि प्रभावित खेतों की मिट्टी, पानी और पौधों की स्थिति का निरीक्षण कर समस्या का कारण बताया जाए तथा जरूरत पड़ने पर उपचार और फसल प्रबंधन की सलाह दी जाए।
किसानों की मेहनत पर टिकी उम्मीद
धान की फसल तैयार करने के लिए किसान कई महीनों तक मेहनत करते हैं। खेत की तैयारी से लेकर रोपाई, खाद, पानी, निराई-गुड़ाई और फसल की देखभाल तक किसान लगातार खेत में जुटे रहते हैं। ऐसे में जब फसल में अचानक पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं तो किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है
फिलहाल गोल्डन धान की फसल में दिखाई दे रहे पीलापन का सटीक कारण कृषि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। किसानों को सलाह है कि बिना समस्या की पहचान किए किसी भी दवा या रसायन का प्रयोग न करें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लेकर ही आगे की कार्रवाई करें
अब देखना होगा कि कृषि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर किसानों को कब तक समस्या का स्पष्ट कारण और उचित समाधान उपलब्ध कराया जाता है
फिलहाल खेतों में दिखाई दे रहा धान का पीलापन किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है और किसानों को उम्मीद है कि समय रहते विभागीय जांच और उचित मार्गदर्शन मिलने से उनकी फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा



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