दुर्गेश साहू धमतरी। सोमवार का शाम शहरवासियों के लिए दहशत और रोमांच दोनों लेकर आया। गंगरेल वन क्षेत्र से एक जंगली हाथी अचानक धमतरी शहर की सीमा में दाखिल हो गया। शहर के कुछ वार्डों में उसके घूमने से लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि गनीमत रही कि हाथी ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन भीड़ के कारण स्थिति कई बार बेकाबू होती नजर आई। जानकार बताते हैं कि यह वही हाथी है जो पिछले करीब 20 से 25 दिनों से गंगरेल के आस पास के क्षेत्र में विचरण कर रहा था। दो दिन तक वह बालोद वन क्षेत्र में रुका और फिर गंगरेल बांध की ओर बढ़ा। धमतरी वन मंडल अधिकारी कृष्णा जाधव ने बताया हाथी को सिंगपुर क्षेत्र जाना था, लेकिन नदी में पानी अधिक होने के कारण वह रुक गया। हाथी पानी में उतरने से हिचकिचा रहा था, जिसके चलते वह नदी पार करने का दूसरा रास्ता खोजते हुए रुद्री क्षेत्र की तरफ निकल आया। रुद्री पहुंचने पर गाड़ियों के सायरन और बड़ी संख्या में जुटी भीड़ ने हाथी को असहज कर दिया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लगातार उसकी हरकतों पर नजर रखी और भीड़ को दूर हटाने की कोशिश की। अधिकारी के अनुसार, हाथी सामान्य रूप से शांत था, लेकिन लगातार बढ़ती भीड़ और मोबाइल कैमरों की फ्लैश लाइट से वह परेशान हो गया था। हाथी रुद्री कॉलोनी, रामपुर वार्ड, गोकुलपुर, विंध्यवासिनी वार्ड, दानीटोला होते हुए हरपतराई पुल पार कर संबलपुर, कंडेल, बोरसी, पांहदा और पवईनाला की दिशा से निकलकर मगरलोड के जंगलों की ओर बढ़ गया। जानकारों का कहना है कि हाथी आमतौर पर अपने तय मार्ग से विचलित नहीं होता, और जिस दिशा से आता है, उसी दिशा से लौट जाता है। वन विभाग की सतर्कता से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में अफवाहों से बचें और वन कर्मियों के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीवों को देखने की उत्सुकता में लापरवाही बरतना खतरनाक हो सकता है।

हाथी का शहर तक पहुंचना केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि जंगल सिमट रहे हैं और वन्यजीवों के रास्ते इंसानी आबादी के करीब आते जा रहे हैं। अब वक्त है कि हम सिर्फ तमाशबीन न बनें, बल्कि समझें जंगली जानवर हमला नहीं करते, वे बस रास्ता ढूंढते हैं… और गलती अगर हमारी हो, तो नुकसान दोनों का होता है।