दुर्गेश साहू धमतरी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के लिए एकलव्य खेल मैदान में आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम भले ही भव्य और हाई-प्रोफाइल दिखा हो, लेकिन मैदान के भीतर बैठी भीड़ के लिए यह अनुभव उतना सम्मानजनक साबित नहीं हुआ। मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कई मंत्री मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और किसानों के खातों में राशि अंतरित की। धमतरी जिले के 96 हजार से अधिक किसानों को 19 करोड़ 21 लाख रुपये मिले। लेकिन जिस कार्यक्रम को सम्मान का नाम दिया गया था, वहीं बैठी जनता को सम्मान से ज्यादा असुविधा झेलनी पड़ी। भीड़ को दोपहर से बैठा दिया गया था, लेकिन पानी और नाश्ते की व्यवस्था न के बराबर दिखाई दी। कई लोग भूख-प्यास से परेशान थे। कार्यक्रम जैसे-जैसे लंबा होता गया, लोग बाहर निकलना चाहते थे, लेकिन दरवाजे बंद कर दिए गए थे। बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे सभी थक चुके थे, पर उन्हें बाहर जाने नहीं दिया गया। इस स्थिति से नाराज़ होकर कुछ लोग दीवार फांदकर बाहर निकले। उनके अनुसार, इतनी देर तक कार्यक्रम में बैठने के बाद भी बाहर के मार्ग बंद रखना समझ से परे था।
कार्यक्रम स्थल पर खाली कुर्सियाँ भी दिखीं। कई लोग बीच में ही लौट गए, जिससे यह साफ था कि व्यवस्थाएँ जनता की सहूलियत के हिसाब से नहीं थीं। शहर में पिछले कुछ दिनों से सजावट, साफ-सफाई और VIP स्वागत की तैयारियाँ जोर-शोर से हुईं, लेकिन उन्हीं तैयारियों के बीच जनता की बुनियादी आवश्यकताएँ कहीं पीछे छूट गईं। लोगों ने कहा कि हम किसानों का सम्मान करने आए थे, लेकिन भूखे-प्यासे बैठाए जाने का अनुभव सम्मानजनक नहीं था। अगर भीड़ को इतनी देर तक इंतजार कराना ही था, तो भोजन-पानी और निकलने के स्पष्ट प्रबंध होने चाहिए थे। कई लोगों का कहना था कि भीड़ बढ़ाने की जल्दी में सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी की गई।

अब सवाल यही है कि जब लाखों रुपये की तैयारियों से मंच और शहर सज सकता है, तो क्या जनता की सुविधा और सम्मान सुनिश्चित करना इतना मुश्किल था?