धमतरी। शहर में वाहन नंबर डुप्लिकेशन का एक गंभीर मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के रियाज़ुद्दीन उस समय हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि उनकी ही गाड़ी के नंबर सीजी 17 एच 1721 का इस्तेमाल एक दूसरी गाड़ी भी कर रही है और वह गाड़ी दुर्ग क्षेत्र में दौड़ रही है। इस बात की जानकारी किसी अधिकारी ने नहीं बल्कि जीपीएस लगाने वाले कर्मचारी ने दी। रियाज़ुद्दीन ने अपनी गाड़ी में हर साल की तरह जीपीएस रिचार्ज कराया था। गाड़ी मिरीटोला सोसाइटी में लोडिंग के लिए गई, एंट्री भी हो चुकी थी, लेकिन जब वह जीपीएस लोकेशन देखना चाहते थे तो उपकरण काम नहीं कर रहा था। इसके बाद उन्होंने जीपीएस इंचार्ज से संपर्क किया, जहां से हैरान कर देने वाली जानकारी मिली कि उनके नाम से एक और वाहन दुर्ग में चल रहा है। इंचार्ज ने उन्हें उस वाहन का वीडियो भी भेजा जिसमें बिल्कुल उसी नंबर की गाड़ी सड़क पर चलती दिखाई दे रही थी।
रियाज़ुद्दीन का कहना हैं फर्जी नंबर प्लेट वाली यह गाड़ी किसी भी अवैध गतिविधि या दुर्घटना में शामिल हो सकती है और दोष उनके सिर मढ़ा जा सकता है। उन्होंने पुलिस से इस बात की जांच की मांग की है कि असली गाड़ी कौन सी है और नकली कौन सी, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि धान परिवहन जैसी सरकारी प्रक्रिया में उनका वाहन शामिल रहता है, ऐसे में किसी अन्य वाहन का उसी नंबर से चलना सीधे-सीधे व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि शहर में एक ही नंबर की दो गाड़ियाँ आखिर कैसे चल रही हैं। क्या आरटीओ और पुलिस द्वारा की जाने वाली नियमित जांच सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। अगर एक मामला सामने आया है तो क्या यह संभव है कि ऐसे कई और वाहन शहर में बेधड़क घूम रहे हों। क्या फर्जी नंबर प्लेट बनाने और लगाने का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।रियाज़ुद्दीन ने कोतवाली थाना पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई है और कहा है कि उन्हें अपनी गाड़ी और अपने नाम की सुरक्षा चाहिए। लेकिन शहर में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि जब वाहन नंबर भी सुरक्षित नहीं हैं तो नागरिकों की सुरक्षा किस भरोसे पर टिकी है।
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