धमतरी : धमतरी जिला के अंतर्गत मगर लोड ब्लॉक के अंतर्गत भरदा गांव की रहने वाला श्री तोमन सिंह साहू जो कृषि नवाचार और जल संरक्षण के साथ-साथ फसल चक्र परिवर्तन कर आधुनिक, नवाचारी एवं लाभकारी मिलेट की खेती की दिशा में प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है । परंपरागत धान की खेती को छोड़कर तोमन सिंह साहू भरदा निवासी एक दशक पहले अपने घर की बाड़ी में रासायनिक खाद डालकर अनेक तरह की सब्जियां फसल उगाता था, परिवार के लोग लगातार खाकर बीमार पड़ते थे तब समझ में आया कि रसायनों के उपयोग से उगाई गई सब्जियां ही हमारी सेहत को बिगाड़ रही है ऐसे में मैंने अपने घर में पाल रखी पांच गाय की गोबर, गोमूत्र से गोबर खाद बनाकर और प्राकृतिक तरीकों से खेती की शुरुआत की, यह प्रयोग सफल रहा आज मैं अपने घर की बाड़ी मे जैविक खेती कर रहा हूं हर साल एक लाख से अधिक की आमदनी अर्जित हो रही है साढे चार एकड़ खेत में पहले दोनों ही सीजन में धान फसल लेता था अधिक उत्पादन लेने रासायनिक खाद अधिक डालकर खेती करता था , कृषि लागत अधिक हुई, आमदनी कम होने लगा, सेहत खबर हुई, कृषि वैज्ञानिकों की मार्गदर्शन से गाय की गोबर से खाद बनाना शुरू किया और इस खाद को अपने खेत में डालकर देखा अधिक पैदावार हुई तब से अपने खेत में रासायनिक खाद नही डालने का मन बनाया और रासायनिक खाद का उपयोग करना पूरी तरीका से बंद कर दिया ,पहले हमने अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर सेहत सुधर कराई गई कृषि विभाग की वरिष्ठ कृषि अधिकारी कीर्तन सिंह नरेटी, सूरज कुमार देवांगन, संतोष कुमार बघेल, कौशल प्रधान, उद्यानिकी विभाग, फत्ते लाल पटेल उप परियोजना अधिकारी, कृषि विभाग उप संचालक मोनेश साहू जिला प्रशासन, कृषि विभाग के अधिकारियो से संपर्क होने के बाद उनसे प्रेरित होकर जैविक खेती करना प्रारंभ किया, जैविक खेती से मुझे हर वर्ष लगभग तीन लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हुई कृषि वैज्ञानिकों के वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशानुसार हमने फसल चक्र परिवर्तनकर धान की बदले ग्रीष्म काल में दलहन तिलहन एवं गेहूं चना सरसों की खेती के साथ-साथ सब्जी की खेती करना प्रारंभ किया , गाय के गोबर खाद, वर्मी खाद, हरिखाद पेड़ पौधा पत्ते, कंपोस्ट,गोबर ,गोमूत्र ,गुड ,बेसन, नीम करंज , धतूरा और छाछ से तैयार होने वाले अलग-अलग जीवामृत , बीजा अमृत , निमास्त्र, आग्नेयास्त्र , ब्रह्मास्त्र, दस परणी अर्क बनाया, जैविक खाद का प्रयोग शुरू किया, खाद बनाने के लिए गोबर एवं गोमूत्र की व्यवस्था की गई, इससे जमीन की उत्पादकता में वृद्धि हुई और अच्छी पैदावार होने लगी धीरे-धीरे जब उत्पादन बढ़ा , खेती को व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए व्यवसायिक सब्जी उत्पादन क्षेत्र का चुना प्राकृतिक खेती और नवीन तकनीकी, नवाचारों को अपनाया इससे उनकी पहचान अब पूरे क्षेत्र में बन गई है हमने अपने खेत में टमाटर ,मिर्ची ,बैगन लौकी ,कद्दू, पत्ता गोभी, बरबटी, फूलगोभी ,अरहर ,आलू ,मेथी ,धनिया मूली, पालक ,प्याज ,बंद गोभी ,सेमी के साथ-साथ औषधि फसल शतावर, बच, नींबू, बचौली ,लेमनग्रास ,हल्दी ,अदरक , लहसुन कोच्ई ,पपीता ,आम , गन्ना , रीटा ,गेंदा सदा सुहागन, एलोवेरा ,ब्राह्मी ,तुलसी अश्वगंधा सहित सुगंधित एवं औषधि फसलों की खेती शुरू की है, प्राकृतिक खेती से सब्जियों का स्वाद काफी बेहतर रहता है और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होने के कारण स्थानीय बाजार में भी उनकी मांग हमेशा बनी रहती है ग्राहक सीधे घर में आकर खरीद कर ले जाते हैं जैविक फसलों की मांग शहरी हो या स्थानी य दोनों बाजारों में कीमत अधिक मिलती हैतोमन सिंह साहू ने बहुविविधीकरण, ड्रिप मलचिंग की खेती को अपनाते हुए लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनाकर दलहनी तिल हैनी लघु धान्य तथा सरसों, धनिया, मक्का देसी वैकल्पिक फसलों को अधिक से अधिक मिश्रित खेती पर जोर देते हुए किसानों को प्रेरित किया है उन्होंने उद्यानिकी आधारित खेती व्यवसाय अपनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त करने का आह्वान किया है

नवीनतम खेती का समन्वय कर आधुनिक कृषि प्रणाली को अपनाते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है उन्होंने आहार में कोदो ,कुटकी, सावा, रागी की खेती पारंपरिक धान की तुलना में जोखिम कम अधिक मुनाफा कमाने उन्होंने बताया कि कोदो , कुटकी, रागी,ज्वार ,बाजरा जैसे श्री अन्न में फाइबर ,आयरन कैल्शियम प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो मधुमेह , मोटापा, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है किसानों से आह्वान किया गया है रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से मिलेट्स उत्पादन अपनाए, छोटे और सीमांत कृषकों के लिए लाभकारी टिकाऊ और सुरक्षित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किस।ने की आमदनी में भी स्थाई वृद्धि होगी