पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने श्रद्धा से किया वट सावित्री व्रत, खुशी साहू ने बताया पूजा का महत्व
संजय देवांगन // धमतरी भारतीय संस्कृति, परंपरा और वैवाहिक जीवन की अटूट आस्था का प्रतीक वट सावित्री व्रत शुक्रवार को जिलेभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सजकर बरगद (वट) वृक्ष के नीचे पहुंचीं, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास पूजा का विशेष आयोजन किया गया महिलाओं ने पूजा की थाली में फल, फूल, दीपक, नारियल, रोली, अक्षत और अन्य पूजा सामग्री रखकर बरगद वृक्ष की पूजा की इसके बाद पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांधते हुए परिक्रमा की गई और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी गई पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला व्रत कर रही खुशी साहू ने वट सावित्री पूजा के महत्व को बताते हुए कहा कि यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और अटूट संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लेकर यह सिद्ध कर दिया था कि सच्चे प्रेम और नारी शक्ति के आगे मृत्यु भी झुक सकती है उसी परंपरा को निभाते हुए महिलाएं आज भी यह व्रत करती हैं खुशी साहू ने कहा कि वट वृक्ष को दीर्घायु और जीवनदायी माना जाता है इसकी जड़ें जितनी मजबूत होती हैं, उसी तरह परिवार भी प्रेम और विश्वास से मजबूत बनता है महिलाएं इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखकर पति की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं उन्होंने कहा कि इस तरह के पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत भी गाए कई स्थानों पर सामूहिक रूप से व्रत कथा का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने एक-दूसरे को वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं दीं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की ग्रामीण इलाकों में भी इस पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया गांवों में महिलाएं समूह बनाकर पूजा स्थल तक पहुंचीं और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा संपन्न की बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी से माहौल और भी उत्सवमय हो गयाधार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं यही कारण है कि यह पर्व हर वर्ष महिलाओं के बीच विशेष आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है पूरे दिन पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों का दौर चलता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा

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