दुर्गेश साहू धमतरी। स्वतंत्रता दिवस पर बधाई संदेशों की होड़ के बीच नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों की ओर से प्रकाशित एक विज्ञापन ने शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वजह संदेश नहीं, बल्कि उसमें नजर आने वाली तस्वीरों की कतार थी। विज्ञापन में प्रदेश और स्थानीय स्तर के कई जनप्रतिनिधियों के साथ नगर निगम सभापति और पार्षदों की तस्वीरें शामिल की गई हैं। अलग-अलग वार्डों के पार्षदों को भी जगह दी गई। लेकिन इसी क्रम में नगर निगम के प्रथम नागरिक महापौर रामू रोहरा की तस्वीर नजर नहीं आई। यही बात अब शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आम तौर पर बधाई विज्ञापनों में जनप्रतिनिधियों की तस्वीरों को लेकर कोई खास सवाल नहीं उठता, लेकिन जब एक ही विज्ञापन में निगम के सभापति और बड़ी संख्या में पार्षदों को स्थान मिले और महापौर की तस्वीर न हो, तो स्वाभाविक रूप से इसके पीछे की वजह को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। हालांकि विज्ञापन में महापौर की तस्वीर क्यों शामिल नहीं की गई, इसका कोई कारण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे सीधे किसी राजनीतिक खींचतान या गुटबाजी से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी। यह डिजाइन या विज्ञापन तैयार करने के दौरान हुई चूक भी हो सकती है। फिर भी नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों की ओर से जारी संदेश होने के कारण इस छोटे से अंतर ने बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। निगम में ठेकेदारों के काम, भुगतान और निर्माण कार्यों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के बधाई विज्ञापन में महापौर की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।
तस्वीर छोटी, चर्चा बड़ी
विज्ञापन में कौन शामिल है और कौन नहीं, यह देखने में भले ही मामूली बात लगे, लेकिन राजनीति में तस्वीरों की अपनी भाषा होती है। खासकर तब, जब एक ही मंच या विज्ञापन में लगभग पूरी निगम परिषद दिखाई दे और प्रथम नागरिक की तस्वीर न हो। फिलहाल कारण स्पष्ट नहीं है। लेकिन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रकाशित यह विज्ञापन शहर में बधाई संदेश से ज्यादा महापौर की तस्वीर आखिर क्यों नहीं? वाले सवाल के कारण चर्चा में है।



0 Comments