नागपंचमी के शुभ अवसर पर नागदेव मंदिर में पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से हुआ पूजन
संजय देवांगन // धमतरी नागपंचमी के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला हटकेशर स्थित नागदेव मंदिर में हटकेशर महिला समिति द्वारा विशेष धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया इस अवसर पर महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा भगवान भोलेनाथ और नागदेवता से क्षेत्र एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की
नागपंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तिमय वातावरण बना रहा महिला समिति की सदस्यों ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया इसके पश्चात शिवलिंग को विधिवत स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। मंत्रोच्चार एवं भक्ति भाव के साथ भगवान शिव का पूजन करते हुए जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई
इस दौरान महिलाओं ने भगवान शिव एवं नागदेवता की आराधना करते हुए परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति तथा क्षेत्र में समृद्धि की प्रार्थना की। पूजा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति देखते ही बन रही थी। महिलाओं ने धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
नागपंचमी का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में नागपंचमी पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नागदेवता की पूजा की जाती है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान होने के कारण नागदेवता की आराधना को शिव आराधना से भी जोड़ा जाता है। श्रद्धालु इस दिन नागदेवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं सुरक्षा की कामना करते हैं
हटकेशर महिला समिति द्वारा आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने क्षेत्र में सामाजिक एकता और धार्मिक भावना को भी मजबूत किया। समिति की महिलाओं ने मिलकर पूजा की तैयारियां पूरी कीं और पूरे विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन संपन्न कराया
पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।
हटकेशर समिति का यह धार्मिक आयोजन नागपंचमी के पावन पर्व पर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण रहा आयोजन के माध्यम से समिति की महिलाओं ने धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक भावना का संदेश दिया


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