दुर्गेश साहू धमतरी। ज्योतिष के क्षेत्र में धमतरी के दीर्घायु रायचूरा ने पीएचडी की उपाधि हासिल की है। राजेश रायचूरा के सुपुत्र दीर्घायु रायचूरा को उदयपुर स्थित श्री महर्षि कॉलेज ऑफ वैदिक एस्ट्रोलॉजी से ज्योतिष विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। उनका शोध विषय ट्रांजिट ऑफ मून एंड मेडिकल एस्ट्रोलॉजी यानी चंद्रमा का गोचर एवं चिकित्सा ज्योतिष रहा। शोध के दौरान उन्होंने मेडिकल एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। उनका कहना है कि शोध को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय ज्योतिष और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को लोगों तक जिम्मेदारी के साथ पहुंचाना उनका उद्देश्य है। डॉ. दीर्घायु रायचूरा मेडिकल एस्ट्रोलॉजी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही इस विषय के अध्ययन को व्यवस्थित और शोधपरक तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
उनका मानना है कि भारतीय ज्योतिष की परंपराओं को समझने के लिए अध्ययन और विवेक जरूरी है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञ की सलाह और आधुनिक चिकित्सा को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वे सामान्य ज्योतिष, ग्रहों के गोचर और इससे जुड़े पारंपरिक अध्ययन के क्षेत्र में भी काम करना चाहते हैं। इसके अलावा भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भारतीय ज्ञान-विरासत के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने को भी अपने कार्य का हिस्सा बनाने की बात कही है।
डॉ. दीर्घायु रायचूरा का कहना है कि भारतीय ज्योतिष देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का हिस्सा है और इसके अध्ययन को जिम्मेदारी, तर्कशीलता तथा परंपरा की समझ के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। पीएचडी की उपाधि को वे अपने शैक्षणिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं और आगे शोध एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में काम करने की इच्छा रखते हैं।
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