दुर्गेश साहू धमतरी। जिले में हालिया दिनों में शक्कर के दामों में आई तेजी का असर अब घरेलू रसोई से आगे सरकारी आयोजनों की चाय तक में महसूस होने लगा है। शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत मेनोनाइट हायर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों और बुजुर्गों के लिए चाय-पानी की व्यवस्था की गई थी, लेकिन चाय में कम मिठास ने वहां मौजूद बुजुर्गों का ध्यान खींच लिया। कार्यक्रम में पहुंचे गोविंद साहू, मनीराम ध्रुव, बृजलाल ध्रुव और हरीलाल मिश्रा ने चाय पी तो उसमें अपेक्षित मिठास नहीं थी। इस पर बुजुर्गों ने मुस्कुराते हुए चुटकी ली कि बाजार में शक्कर के तेवर जिस तरह बदले हैं, लगता है उसका असर अब सरकारी केतली तक पहुंच गया है। कम शक्कर वाली चाय को लेकर उनकी यह टिप्पणी कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
कुछ सप्ताह पहले 80 रुपये तक पहुंचे थे भाव
गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले शक्कर के दाम अचानक बढ़कर करीब 75 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे। इससे घरेलू बजट पर भी असर पड़ा। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ गिरावट आई, लेकिन वर्तमान में थोक बाजार में शक्कर करीब 46 से 50 रुपये और खुदरा बाजार में 60 से 65 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई जा रही है। बुजुर्गों की यह बात भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई, लेकिन इसके पीछे महंगाई का असर साफ दिखाई दिया। कार्यक्रम में सम्मान और आयोजन की अन्य व्यवस्थाओं के बीच चाय में कम शक्कर को लेकर यह चर्चा भी हुई कि सरकारी आयोजनों में टेंट, मंच और दूसरी व्यवस्थाओं पर खर्च होता है, लेकिन चाय जैसी छोटी व्यवस्था में भी महंगाई का असर नजर आने लगा है। वृद्धजन दिवस पर बुजुर्गों को सम्मान मिला, लेकिन चाय की फीकेपन ने महंगाई के दौर की एक अलग तस्वीर जरूर सामने रख दी। हालांकि बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चाय में शक्कर कम रखी गई हो, इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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