दुर्गेश साहू धमतरी। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के दौरान करीब 60 हजार रुपये भुगतान करने के मरीज के आरोप और अस्पताल प्रबंधन के जवाब के बीच रकम वापसी को लेकर विरोधाभास सामने आया है। मामले में सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने 1 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट जारी की थी। अस्पताल संचालक डॉ. विभोर नंदा का कहना है कि मरीज को 22 हजार रुपये लौटाए गए थे और इसकी लिखित पावती ली गई थी। वहीं, मरीज हरिश्चंद्र देवांगन का दावा है कि उसे कोई रकम वापस नहीं मिली। इस मामले में मरीज ने 8 अक्टूबर को कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य मंत्री और मानवाधिकार आयोग को दोबारा शिकायत भेजी थी। इसके बाद कलेक्टर ने टीम भेजकर जांच कराने की बात कही थी। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रस्तावित जांच में पहले की रिपोर्ट की समीक्षा होगी या शिकायत के अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।

   अस्पताल संचालक बोले- 22 हजार रुपये लौटाए
शिवनंदा अस्पताल के संचालक डॉ. विभोर नंदा के मुताबिक, मरीज को शुरुआत में जिस समस्या के आधार पर भर्ती किया गया था, वह आयुष्मान योजना के संबंधित पैकेज में शामिल नहीं थी। बाद में कूल्हे में फ्रैक्चर सामने आने पर उसका इलाज योजना के तहत किया गया। संचालक का दावा है कि पहले लिए गए 22 हजार रुपये मरीज को लौटा दिए गए थे और इसकी लिखित पावती भी ली गई थी। उन्होंने ऑपरेशन से पहले मरीज और उसके बेटे से दबाव डालकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के आरोपों को निराधार बताया। उनके अनुसार, मरीज करीब सात से आठ दिन अस्पताल में भर्ती रहा और इलाज के दौरान परिजनों ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी।

      सीएमएचओ ने पावती देखने की बात कही
सीएमएचओ डॉ. अरुण टोंडर ने बताया कि मरीज को दौरा पड़ने और गिरने के बाद चोट लगने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके मुताबिक, शुरुआती समस्या आयुष्मान पैकेज में शामिल नहीं थी, जबकि बाद में सामने आए फ्रैक्चर का इलाज योजना के तहत किया गया। सीएमएचओ ने कहा कि उन्होंने 22 हजार रुपये लौटाए जाने की पावती स्वयं देखी थी। उनके अनुसार, विभाग ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच की और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

     मरीज का दावा- कोई रकम वापस नहीं मिली
हरिश्चंद्र देवांगन का कहना है कि इलाज के दौरान उसने करीब 45 हजार रुपये ऑनलाइन और 15 हजार रुपये नकद दिए थे। उसके मुताबिक, कुल करीब 60 हजार रुपये भुगतान करने के बावजूद उसे कोई राशि वापस नहीं मिली। मरीज ने ऑपरेशन से पहले खुद और अपने बेटे से कई पन्नों पर हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप भी लगाया है। अस्पताल प्रबंधन इन आरोपों से इनकार कर चुका है।

           अब आगे की कार्रवाई पर नजर
मामले में अस्पताल संचालक और सीएमएचओ ने 22 हजार रुपये की वापसी के समर्थन में पावती का हवाला दिया है, जबकि मरीज रकम मिलने से इनकार कर रहा है। ऐसे में पावती और संबंधित दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने टीम भेजकर जांच कराने की बात कही थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि पहले की रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी या जांच का दायरा अलग होगा। अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई से ही पता चलेगा कि रकम वापसी को लेकर सामने आए विरोधाभास और शिकायत के अन्य बिंदुओं पर क्या निष्कर्ष निकलता है।