दुर्गेश साहू धमतरी। शहर में नाले में डूबकर मासूम लक्ष्य साहू की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। हादसे के बाद निगम और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, इंतजामों की बात हुई और नई पुलिया को लक्ष्य सेतु नाम देने की घोषणा भी सामने आई। लेकिन सवाल यह है कि शहर में ऐसे कितने नाले, पुल-पुलिया और खुले हिस्से आज भी हादसे को न्योता दे रहे हैं और उनकी सुध कौन लेगा। मकेश्वर वार्ड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी इसका उदाहरण है। यहां 43 स्कूली बच्चों और 12 आंगनबाड़ी बच्चों की आवाजाही है। स्कूल भवन से सटा खुला नाला, जगह-जगह जमा गंदा पानी, कचरा और मलबा बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। नाले के कुछ हिस्सों पर स्लैब है, लेकिन कई जगह यह खुला पड़ा है। आसपास पर्याप्त सुरक्षा घेरा भी नजर नहीं आता। नाले के आसपास गंदा पानी और गंदगी के साथ जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। स्कूल से जुड़ी मोनिका साहू के मुताबिक, इस समस्या को लेकर डीईओ कार्यालय में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि बच्चों के नाले में गिरने का डर बना रहता है और स्कूल परिसर में सांप भी पहुंच चुके हैं।
हादसे के बाद सक्रियता, पहले सुरक्षा पर क्यों नहीं
मासूम की मौत के बाद पुलिया को यादगार बनाने के लिए उसका नाम लक्ष्य सेतु रखने की बात सामने आई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी हादसे के बाद नामकरण ही सुरक्षा व्यवस्था का विकल्प बन सकता है। निगम की जिम्मेदारी सिर्फ घटना के बाद पहुंचकर राहत देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शहर के भीतर जहां खुले नाले और असुरक्षित पुल-पुलिया मौजूद हैं, वहां पहले से सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए जाते यह लोगों का सवाल है। नगर निगम आयुक्त अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। खुले नालों को कवर करने या उनकी ऊंचाई बढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि बच्चे वहां तक न पहुंच सकें। अब जरूरत इस बात की है कि यह कार्रवाई सिर्फ आश्वासन तक सीमित न रहे। शहर में कितने स्थान दुर्घटना के लिए जोखिम बने हुए हैं, उनका सर्वे कब होगा और सुरक्षा व्यवस्था कब तक पूरी होगी। घटना के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का मौके पर पहुंचना जरूरी है, लेकिन जनता का सवाल इससे पहले का है, जब खतरा दिखाई दे रहा हो तो सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए हादसे का इंतजार क्यों किया जाए।
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