दुर्गेश साहू धमतरी। जिले के कुछ प्रशासनिक कार्यालयों में कर्मचारियों की पदस्थापना और वास्तविक ड्यूटी को लेकर चर्चा है। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारी अपनी निर्धारित जगह पर खुद ड्यूटी करने के बजाय अपनी जगह दूसरे व्यक्ति को भेज रहे हैं, जबकि वे निजी काम में व्यस्त रहते हैं। चर्चा यह भी है कि जिम्मेदार स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद व्यवस्था जारी है। यदि ऐसा है तो यह जानना जरूरी है कि नियुक्त कर्मचारी की जगह दूसरे व्यक्ति को शासकीय काम करने की अनुमति किस आधार पर दी गई है और ऐसे मामलों में जवाबदेही किसकी तय होती है। सरकारी व्यवस्था में पदस्थापना, उपस्थिति और कार्यदायित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड रहता है। इसलिए संबंधित कार्यालयों में पदस्थापना आदेश, उपस्थिति पंजी और वास्तविक ड्यूटी स्थल का मिलान किया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। बताया जा रहा है कि ऐसी व्यवस्था कोई नई नहीं है और कुछ स्थानों पर लंबे समय से इसी तरह काम चलने की चर्चा है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी काम की जिम्मेदारी जिस कर्मचारी को सौंपी गई है, उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति से नियमित काम कराया जाना नियमों और जवाबदेही, दोनों से जुड़ा विषय है। अब जरूरत रिकॉर्ड के सत्यापन की है, ताकि स्पष्ट हो सके कि सरकारी पद की जिम्मेदारी उसी कर्मचारी द्वारा निभाई जा रही है या व्यवस्था किसी और के भरोसे चल रही है।