धमतरी। सिहावा क्षेत्र को सदियों से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता है। घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा यह इलाका आज भी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं का प्रमुख केंद्र है। यहां ऐसे कई स्थल हैं, जिनसे जुड़ी कथाएं और विश्वास आज भी लोगों की श्रद्धा को जीवित रखते हैं। इन्हीं आस्थाओं के बीच रिसगांव क्षेत्र में स्थित रिसई माता का धाम विशेष महत्व रखता है। ग्रामीणों के अनुसार, सोनढूर डैम के अंतिम छोर पर पहाड़ और जंगल के बीच एक स्थान ऐसा है, जहां देवी के आंसू गिरने की मान्यता है। बताया जाता है कि इसी स्थान से आज भी पानी निरंतर बहता है और भीषण गर्मी में भी यहां जल की कमी नहीं होती। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राचीन समय में देवी इसी स्थान पर विराजमान होकर रो रही थीं। बाद में देवताओं द्वारा उन्हें रिसगांव के पास स्थापित किया गया, जहां आज उनका मंदिर बना हुआ है और नियमित पूजा-अर्चना होती है। वहीं जहां देवी के आंसू गिरे थे, वह स्थान आज भी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीण बताते हैं कि इस स्थान का जल कभी सूखता नहीं है। जंगल में जाने वाले लोग आज भी यहां अपनी प्यास बुझाते हैं और समय-समय पर पूजा-अर्चना भी करते हैं। यह स्थल आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक रहस्य का भी प्रतीक बन गया है।
          
            नवरात्र में उमड़ती है आस्था
चैत्र नवरात्र के दौरान इस क्षेत्र में श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिलता है। ग्रामीण माता के मंदिर में आस्था के दीप जलाते हैं और अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। मान्यता है कि माता अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और क्षेत्र को संकटों से बचाए रखती हैं। अष्टमी के दिन यहां विशेष हवन-पूजन का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि माता की कृपा से गांव में शांति बनी रहती है और किसी प्रकार की बड़ी विपत्ति नहीं आती।

           आस्था के साथ विकास की मांग
घने जंगलों के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल अब धीरे-धीरे श्रद्धालुओं के बीच पहचान बना रहा है। हालांकि, यहां पहुंचने के लिए अब भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस क्षेत्र में सड़क और पुल निर्माण की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं को आने-जाने में सुविधा मिल सके।

रिसई माता का यह धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और लोकविश्वास का ऐसा संगम है, जहां आज भी बहता जल लोगों के विश्वास को जीवित रखे हुए है।