धमतरी। खाद्य पदार्थों को तलने में उपयोग किए जाने वाले तेल के बार-बार इस्तेमाल से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए धमतरी में एक सराहनीय पहल सामने आई है। शहर के खाद्य कारोबारी भारत निषाद ने उपयोग किए गए कुकिंग ऑयल को बायोडीजल निर्माण के लिए उपलब्ध कराने का संकल्प लेते हुए नई शुरुआत की है। माना जा रहा है कि जिले में इस प्रकार की पहल करने वाले वे संभवतः पहले खाद्य कारोबारी हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मार्गदर्शन में भारत नमकीन भंडार से लगभग 250 लीटर प्रयुक्त कुकिंग ऑयल एकत्र कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से बायोडीजल निर्माण के लिए भेजा गया है। यह प्रक्रिया भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की RUCO (Repurpose Used Cooking Oil) योजना के अंतर्गत की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा खाद्य श्रृंखला में आने से रोकना और उसका सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार उपयोग किया गया कुकिंग ऑयल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे तेल में कुल ध्रुवीय यौगिक (TPC) की मात्रा बढ़ जाती है, जो लंबे समय में कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसी कारण FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन करते हुए उपयोग किए गए तेल को दोबारा भोजन बनाने में इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले के होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य कारोबारियों से भी अपील की है कि वे इस पहल से जुड़ें और उपयोग किए गए कुकिंग ऑयल को अधिकृत एजेंसियों को उपलब्ध कराएं। इससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में बायोडीजल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
धमतरी में भारत निषाद की यह पहल अन्य खाद्य कारोबारियों के लिए भी प्रेरणादायी मानी जा रही है। स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी इस जिम्मेदारी को यदि व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो इसका लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को मिल सकता है।