एनएसयूआई का आंदोलन, चुनाव बहाली की मांग

धमतरी प्रदेश में छात्र राजनीति को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से लंबित छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर National Students' Union of India (एनएसयूआई) ने अब खुलकर संघर्ष का ऐलान कर दिया है इसी कड़ी में आज धमतरी स्थित Rajiv Bhawan Dhamtari में संगठन द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित कर अपनी रणनीति और नाराजगी को विस्तार से सामने रखा गया पत्रकारों से चर्चा करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्षों से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए जाने के कारण छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है। इससे न केवल छात्र नेतृत्व का विकास रुक गया है, बल्कि छात्रों की समस्याएं भी अनसुनी रह जा रही हैं

छात्रों की आवाज दबाने का आरोप एनएसयूआई जिलाध्यक्ष Raja Devangan ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र संघ चुनाव बंद होने से छात्रों के पास अपनी बात रखने का कोई मजबूत मंच नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है उन्होंने यह भी कहा कि छात्र केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज और राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में छात्र संघ चुनाव का न होना युवाओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार है

गंभीर समस्याओं से जूझ रहे छात्र

पत्रकार वार्ता में छात्रों से जुड़े कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान समय में छात्र कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं— लगातार बढ़ती कॉलेज फीस, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है

छात्रवृत्ति वितरण में देरी, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है

महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है कॉलेज परिसरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और देरी, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है इन समस्याओं के समाधान के लिए छात्र संघ का होना बेहद जरूरी बताया गया, ताकि छात्र प्रतिनिधि प्रशासन तक इन मुद्दों को मजबूती से उठा सकें छात्र संघ चुनाव: अधिकार और प्रतिनिधित्व का माध्यम एनएसयूआई ने साफ किया कि छात्र संघ चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह छात्रों को नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी का अवसर देता है। इससे छात्र अपनी समस्याओं को संगठित रूप से रख पाते हैं और समाधान की दिशा में ठोस पहल कर सकते हैं प्रदेशभर में आंदोलन का रोडमैप तैयार संगठन ने अपनी आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है—

30 मार्च 2026: प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में ज्ञापन सौंपा जाएगा

06 अप्रैल 2026: प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का घेराव किया जाएगा

16 से 20 अप्रैल 2026: संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vinod Jakhar के नेतृत्व में राजधानी में सीएम हाउस घेराव किया जाएगा

एनएसयूआई ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से शुरू किया जाएगा, लेकिन यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकार को दी कड़ी चेतावनी

संगठन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किए जाते हैं, तो एनएसयूआई प्रदेशभर में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी

ये कार्यकर्ता रहे मौजूद

इस दौरान जिलाध्यक्ष के साथ यश दुबे, नमन बंजारे, प्रीतम सिन्हा, तेजप्रताप साहू, लिकेश साहू, रोशन वंदे, सुदीप सिन्हा और नोमेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के संकेत धमतरी से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में छात्र राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। जिस तरह से एनएसयूआई ने आंदोलन का विस्तृत खाका तैयार किया है, उससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा रूप ले सकता है।

👉 अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है—समाधान या संघर्ष!