दुर्गेश साहू, धमतरीकसावाही गांव में जल संकट की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हुई और पीएचई विभाग की टीम गांव पहुंच गई। आनन-फानन में खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत शुरू की गई, पानी टंकी की सफाई हुई और पाइपलाइन व्यवस्था दुरुस्त करने का काम भी किया गया। मरम्मत के बाद कई हैंडपंपों और नलों से पानी निकलना शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीणों को थोड़ा राहत मिली है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब मरम्मत के बाद पानी निकल सकता था, तो आखिर यह काम पहले क्यों नहीं हुआ? ग्रामीणों को इतने दिनों तक बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ा? कुछ दिन पहले तक गांव के लोग दो किलोमीटर दूर नहर से पानी लाने को मजबूर थे। बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और बाइक में ड्रम बांधकर लोग पानी ढो रहे थे। कई परिवार गंदा पानी पीने को मजबूर थे। गांव में सुबह से शाम तक सिर्फ पानी की जद्दोजहद चल रही थी। अब जब एक दिन के भीतर अधिकांश खराब हैंडपंप सुधर गए और कुछ जगहों पर पानी भी आने लगा, तो ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि समस्या केवल गिरते जलस्तर की थी या फिर लंबे समय से विभागीय लापरवाही और मॉनिटरिंग की कमी भी इसकी बड़ी वजह थी।
जलाशय के पास ही जल संकट, तो दूर गांवों का क्या हाल?
कसावाही गांव गंगरेल जलाशय से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिस इलाके से जल संरक्षण और जल जगार जैसे अभियानों का संदेश दिया गया, उसी क्षेत्र के ग्रामीण पानी के लिए भटकते रहे। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि जलाशय के इतने करीब बसे गांव की यह स्थिति है, तो उन दूरदराज गांवों की हालत क्या होगी जहां पानी के बड़े स्रोत भी उपलब्ध नहीं हैं।

जिम्मेदारी आखिर किसकी?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खराब हैंडपंपों की मरम्मत और पानी टंकी की देखरेख होती, तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संबंधित विभाग को पहले से समस्या की जानकारी नहीं थी, या फिर शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई। यह मामला अब सिर्फ जल संकट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी, रखरखाव और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

इस संबंध में कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि खबर के माध्यम से कसावाही में पेयजल संकट की जानकारी मिलने के बाद पीएचई विभाग की टीम भेजी गई थी। उन्होंने बताया कि गर्मी में धान की फसल और अधिक जल दोहन के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। उन्होंने कहा कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई है और स्थिति की लगातार निगरानी की जाएगी। साथ ही किसानों से कम पानी वाली फसलों को अपनाने की अपील भी की गई है।

फिलहाल गांव में पानी पहुंचना शुरू होने से लोगों को राहत जरूर मिली है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल छोड़ दिया है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त होती, तो क्या कसावाही के लोगों को प्यास और परेशानी का यह दौर झेलना पड़ता?