दुर्गेश साहू धमतरी। किसी परिवार ने अभी-अभी अपने घर के एक सदस्य को खोया हो। पूरा गांव दुख में डूबा हो। लोग नम आंखों से अंतिम विदाई देने श्मशान की ओर बढ़ रहे हों। लेकिन जैसे ही श्मशान पहुंचने लिए कच्चा रास्ता टूटे पुल और उफनते नाले के सामने खत्म हो जाए, तब उस परिवार पर क्या गुजरती होगी। स्थित ग्राम पंचायत खम्हरिया में पिछले करीब चार साल से कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। यहां ग्रामीण अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक श्मशान घाट में नहीं कर पा रहे है। मजबूरी में किसी को नाले किनारे तो किसी को खेतों के पास अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। पूरा मामला धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र के ग्राम पंचायत खम्हरिया का है। गांव और श्मशान घाट के बीच बहने वाले तेरगी नाला पर बना पुल वर्षों पहले टूट चुका है। इसके बाद से श्मशान घाट तक पहुंचना बंद हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह श्मशान दशकों पुराना है और गांव की कई पीढ़ियों की अंतिम विदाई इसी स्थान से हुई है, लेकिन अब लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पा रहे। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2008 के आसपास नाले पर 65 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद बाढ़ में पुल बह गया। आज भी टूटे पुल के अवशेष नाले के बीच खड़े हैं, जो अधूरे और कमजोर निर्माण की कहानी बयान करते नजर आते हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुल निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जहां मजबूत निर्माण होना चाहिए था, वहां कमजोर सामग्री का उपयोग कर सिर्फ औपचारिकता पूरी कर दी गई।
श्मशान तक जाने के लिए खेतों की मेड़ बना सहारा
गांव के लोगों के मुताबिक, श्मशान तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता भी नहीं है। कुछ किसानों ने अपने खेतों का हिस्सा छोड़कर कच्चा मेड जैसा रास्ता बना दिया है, लेकिन वह इतना संकरा है कि अर्थी लेकर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बरसात में हालात और बदतर हो जाते हैं। ग्रामीण खेदुराम ध्रुव का कहना है कि कई बार ऐसी स्थिति बनी जब अंतिम संस्कार के दौरान पुराने शवों के अवशेष भी बाहर निकल आए। इससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं और पूरे गांव में पीड़ा का माहौल बन जाता है। गांव वालों के मुताबिक यह केवल रास्ते या पुल की समस्या नहीं, बल्कि मृतकों के सम्मान और ग्रामीणों की आस्था से जुड़ा मामला है।
बार-बार गुहार, लेकिन समाधान नहीं
ग्राम पंचायत खम्हरिया सरपंच संतकुमार मरकाम कहना है कि पुल निर्माण और श्मशान तक रास्ता बनाने की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिए गए। कुछ समय पहले नाराज ग्रामीणों ने चक्का जाम की कोशिश भी की थी। उस समय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जल्द समाधान का आश्वासन देकर मामला शांत कराया, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति नहीं बदली। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो सुशासन तिहार के बाद 20 जून से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
यह सिर्फ पुल नहीं, व्यवस्था की तस्वीर है
खम्हरिया का टूटा पुल अब केवल एक निर्माण नहीं रह गया है। यह उस व्यवस्था की तस्वीर बन चुका है जहां गांव के लोग अपने मृत परिजनों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि सड़क, पुल और श्मशान जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अगर वर्षों तक अधूरी रहें, तो फिर विकास आखिर किसे कहते हैं?
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