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धमतरी। कहते हैं कि एक अच्छी किताब सिर्फ ज्ञान नहीं देती, बल्कि जिंदगी की दिशा भी बदल सकती है। लेकिन समाज में ऐसे हजारों प्रतिभाशाली युवा हैं, जिनके सपने किताबों की बढ़ती कीमतों और सीमित संसाधनों के बीच कहीं दबकर रह जाते हैं। कई विद्यार्थी केवल इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते क्योंकि उनके पास जरूरी पुस्तकें और अध्ययन सामग्री खरीदने की आर्थिक क्षमता नहीं होती। ऐसे ही युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के उद्देश्य से धमतरी पुलिस ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की है। धमतरी पुलिस द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पुस्तकालय की शुरुआत की गई है। रुद्री थाना परिसर में स्थापित इस पुस्तकालय का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने किया। यह पहल केवल एक पुस्तकालय की स्थापना नहीं, बल्कि उन युवाओं के सपनों को सहारा देने का प्रयास है, जो मेहनत और लगन तो रखते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन जाती है। इस पुस्तकालय की परिकल्पना के पीछे पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार की सोच और उनके संघर्षपूर्ण दिनों के अनुभव को भी अहम माना जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने स्वयं पुस्तकों और अध्ययन सामग्री की महत्ता को महसूस किया था। यही कारण है कि उन्होंने ऐसा मंच तैयार करने का प्रयास किया, जहां आर्थिक स्थिति किसी छात्र के सपनों के आड़े न आए।
      अब किताबों की कमी नहीं रोकेगी तैयारी
पुस्तकालय में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (PSC), पुलिस, बैंकिंग, रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। सामान्य अध्ययन, इतिहास, भूगोल, राजनीति, अर्थशास्त्र, विज्ञान और समसामयिक विषयों की पुस्तकों का भी संग्रह रखा गया है, जिससे विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर अध्ययन की बेहतर सुविधा मिल सके। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ उन गरीब, वंचित, ग्रामीण और जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलेगा, जो आर्थिक कारणों से महंगी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हैं। उनके लिए यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है।

        समाज ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ
पुस्तकालय को समृद्ध बनाने में केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और जागरूक नागरिकों ने बड़ी संख्या में पुस्तकें दान की हैं। इस सहयोग से पुस्तकालय का संग्रह लगातार बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में और अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा।
         डीजीपी ने बताया अनुकरणीय पहल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीजीपी अरुण देव गौतम ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा और युवा सशक्तिकरण से जुड़ी ऐसी पहलें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रकार के प्रयास अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और अधिक से अधिक युवाओं को अपने लक्ष्य हासिल करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह सपनों, संभावनाओं और भविष्य निर्माण का केंद्र होता है। यहां बैठकर पढ़ने वाला एक छात्र आने वाले समय में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, पुलिस अधिकारी या समाज का जिम्मेदार नागरिक बन सकता है। यह पुस्तकालय केवल एक भवन या पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए उम्मीद का नया द्वार है, जो परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं।पुस्तकालय के शुभारंभ अवसर पर कलेक्टर अविनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र पाण्डेय, नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक चतुर्वेदी, वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।