दुर्गेश साहू धमतरी। दो दिनों की लगातार बारिश के बाद बाढ़ प्रभावित 15 परिवारों के 54 सदस्यों को कोलियारी स्थित भवन में सुरक्षित ठहराया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में इस भवन को स्किल डेवलपमेंट सेंटर (मधुरिमा) में बनाए गए राहत शिविर के रूप में उल्लेखित किया गया है। दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों ने भवन के उपयोग और बाढ़ प्रभावित परिवारों को यहां ठहराने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण इगेश साहू, सुनील सोनकर, मनीषा सोनकर और अन्य लोगों के अनुसार यह भवन मूल रूप से बाढ़ एवं आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठहराने के उद्देश्य से बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य समय में इसका उपयोग एक संस्था द्वारा किया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को यहां ठहराने को लेकर भी शुरुआत में स्थिति स्पष्ट नहीं थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित लोगों को इस भवन में रखने के बजाय मिडिल स्कूल में शिफ्ट कराने का प्रयास किया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया। उनके मुताबिक विरोध के बाद मुश्किल से भवन के कुछ कमरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को ठहराने की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि भवन को खाली कराने और प्रभावित परिवारों को यहां ठहराने के मामले में ग्राम पंचायत से लेकर अधिकारियों तक संबंधित संस्था को सहयोग मिलता रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आपदा के समय राहत केंद्र, सामान्य दिनों में स्किल सेंटर
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बताया कि सामान्य समय में यह भवन स्किल सेंटर के रूप में उपयोग होता है, जबकि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में इसे आपदा राहत केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि भवन में बिजली, ठहरने की व्यवस्था, टेबल सहित आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। सीईओ ने कहा कि सामान्य तौर पर बाढ़ आपदा केंद्रों में भवन और चारदीवारी जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं होती हैं। इस भवन में प्रभावित लोगों के रुकने की सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण राहत कार्य में इसका उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन की विज्ञप्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि किस विज्ञप्ति के संदर्भ में सवाल किया जा रहा है, इसलिए उस पर सटीक टिप्पणी नहीं कर पाएंगे।
प्रशासन की विज्ञप्ति और जमीनी स्थिति पर सवाल
जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी में कोलियारी स्थित भवन को स्किल डेवलपमेंट सेंटर (मधुरिमा) में बनाए गए राहत शिविर के रूप में बताया गया है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि भवन का आपदा के समय राहत केंद्र के रूप में उपयोग पहले से निर्धारित है। ऐसे में सवाल भवन के इस्तेमाल से ज्यादा उसकी पहचान और उपयोग की स्थिति को लेकर उठ रहा है। यदि भवन सामान्य परिस्थितियों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर और बाढ़ के दौरान आपदा राहत केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है, तो प्रशासन की आधिकारिक जानकारी में इसकी दोनों भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखा गया? वहीं ग्रामीणों द्वारा प्रभावित परिवारों को यहां ठहराने से पहले विरोध और वैकल्पिक स्थान पर भेजने के प्रयास के लगाए गए आरोपों पर प्रशासन का स्पष्ट पक्ष भी सामने आना बाकी है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान मिल गया है। लेकिन भवन के मूल उद्देश्य, सामान्य समय में उसके उपयोग और आपदा के समय प्रभावितों को उपलब्ध कराई गई जगह को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना भी जरूरी है।
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