दुर्गेश साहू धमतरी। जिस दिन महात्मा गांधी की जयंती पर जिलेभर में स्वच्छता और उनके विचारों की चर्चा हो रही थी, उसी दिन कलेक्ट्रेट के सामने स्थापित दांडी मार्च स्मारक उपेक्षा की तस्वीर पेश कर रही थी। झाड़ियों और खरपतवार से घिरे परिसर में कचरा जमा है और गांधी जी की प्रतिमा पर धूल नजर आ रही है। प्रतिमा से उनका चश्मा भी गायब है। कलेक्ट्रेट मुख्य मार्ग पर स्थापित यह दांडी मार्च स्मारक स्वतंत्रता आंदोलन और दांडी मार्च की याद को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में इसकी हालत बिगड़ती जा रही है। झाड़ियों ने झांकी के कई हिस्सों को ढक लिया है। गांधी जयंती के दिन भी यहां सफाई नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों पर खर्च किया जाता है। ऐसे में गांधी जयंती जैसे महत्वपूर्ण दिन कलेक्ट्रेट के सामने गांधी जी की प्रतिमा और दांडी मार्च स्मारक की यह स्थिति सवाल खड़े करती है। नागरिकों का कहना है कि आयोजन और संदेशों के साथ उन स्थानों की देखभाल भी जरूरी है, जो गांधी जी के विचार और स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाते हैं।
कांग्रेस के दावों के बीच स्मारक भी उपेक्षित
गांधी जी को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर बड़े कार्यक्रम और बयान सामने आते रहे हैं। कांग्रेस नेताओं की ओर से भी गांधी विचारों और विरासत को लेकर आयोजन किए जाते हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ता कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन घेराव तक कर चुके हैं, लेकिन सामने गांधी जी की इस दांडी मार्च स्मारक की बदहाली पर अब तक प्रभावी पहल नजर नहीं आई। बीते समय जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर से इस संबंध में सवाल किया गया था। उन्होंने प्रशासन के संज्ञान में मामला लाने तथा प्रतिमा का चश्मा लगवाने और साफ-सफाई कराने की बात कही थी। इसके बावजूद अब तक मौके की स्थिति में बदलाव नहीं दिखना सवाल खड़ा करता है। गांधी जयंती के दिन बापू की प्रतिमा पर धूल और गायब चश्मा केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि उस विरासत के रखरखाव से जुड़ा सवाल है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए झांकी स्थापित की गई थी। अब देखना यह है कि जिम्मेदार प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधि इस ओर कब ठोस पहल करते हैं।
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