गोल्डी खान धमतरी जिला बनने के 25 बरस के बाद आज भी पिछड़े जिलों की तरह जिंदगी जी रहा है जहां सुविधाओं की कमी साफ नजर आती है हालांकि इसका जिम्मेदार कौन है यह हम नहीं कहते मगर दूसरी ओर धमतरी को प्रयोगशाला के नाम से भी जाना जाता है जहां नए नए जिम्मेदार बड़ी बड़ी जिम्मेदारी के साथ यहां आते है या उन्हें यहां आकर बड़ी जिम्मेदारी मिल जाती है बहरहाल जिले में क्या चल रहा है कहा क्या क्या हो रहा है या होता है आम जनता की क्या हालत है क्या हकीकत है इसकी खबर मीडिया से जुड़े लोग रखते है जो उनकी इन बातों को आम जनता और संबंधित विभाग के अलावा शासन प्रशासन से जुड़े अफसरों के बीच पहुंचाने का काम करते है क्योंकि मीडिया से जुड़े लोग जिले के निवासी है और जिले की बेहतरी पर फोकस ज्यादा रखते है हालांकि ये अलग बात है कि पत्रकारों की मेहनत का भी फल अब तक जिले को नहीं मिला है जो आज भी धमतरी जिला पिछड़ा हुआ ही कहलाता है अब बात जिले के कुछ जिम्मेदारों की करे तो उनका अजीब रवैया पत्रकारों के साथ आम जनता को भी हैरान करने वाला रहता है जो कि पत्रकारों के फोन नहीं उठाते उनके नंबरों को अपने फोन में ब्लॉक करके भी रखते है हालांकि ऐसा सभी जिम्मेदार भी नहीं करते है मगर कुछ जिम्मेदार है जिनका यह अजीब रवैया हैरानी भरा है फिर उनके विभागों की भी बात करे तो उनके विभाग के कामकाज में भी उतनी खास तेजी नहीं है जिससे उन्हें काम में ज्यादा ही व्यस्त माना जाए यही वजह है कि आम पब्लिक के साथ पत्रकार भी समय समय पर जिले में आने वाले नेता मंत्रियों और बड़े अफसरों से ऐसे कुछ अफसरों की शिकायत भी करते रहते है ताकि उनके व्यवहार में सुधार हो सके वैसे यहां लंबे समय से सेवा देने वाले जिम्मेदारों की भी कमी नहीं है ऐसे में क्या ही धमतरी का भला होगा ऐसा धमतरी के लोग कहते है क्योंकि जब जिम्मेदार पत्रकारों के फोन न उठाए तो आम जनता की क्या ही सुनेंगे ऐसा भी लोगो का मानना है
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