दुर्गेश साहू धमतरी। गंगरेल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा भी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने की दिशा में जुटे हैं। लेकिन इसी क्षेत्र से सामने आई पेड़ों की कटाई की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। गंगरेल बांध के निचले हिस्से में पांच से अधिक मोटे पेड़ कटे हुए मिले हैं। मौके पर पेड़ों के बड़े-बड़े ठूंठ और कटे तने नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेड़ों की कटाई में ट्री कटर मशीन और जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। हालांकि यह जांच का विषय है। कटे पेड़ों की लकड़ियां भी मौके पर दिखाई नहीं दे रही हैं। लोगों का कहना है कि इतने मोटे पेड़ों की कटाई किसने और किस उद्देश्य से की, यह स्पष्ट होना चाहिए। यदि पेड़ किसी विभागीय काम के लिए काटे गए हैं, तो इसकी अनुमति किसने दी और लकड़ियों को कहां ले जाया गया, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र जल संसाधन विभाग के अधीन है। ऐसे में पेड़ों की कटाई और लकड़ियों के निस्तारण को लेकर विभागीय जवाबदेही भी अहम है। एक ओर जिला प्रशासन गंगरेल में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की कटाई का मामला पर्यावरण संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर कटाई के कारणों, अनुमति और लकड़ियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करे। इस मामले में जल संसाधन विभाग, कोड नंबर 38 के कार्यपालन अभियंता (ईई) हेमलाल कुरेसिया से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कॉल कनेक्ट नहीं हो पाया। इस कारण पेड़ों की कटाई के संबंध में विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका है। वही इस विषय में डीएफओ कृष्णा जाधव से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि शिकायत आया है मौके पर टीम को भी भेजा गया है फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पेड़ किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में काटे गए। मामले में विभागीय जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
0 Comments