दुर्गेश साहू धमतरी। शारदीय नवरात्र में धमतरी से करीब 12 किलोमीटर दूर ग्राम बरारी के जंगल में स्थित माता लोल्लर दाई के दरबार में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस नवरात्र में यहां 179 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। इनमें 24 घी और 155 तेल के ज्योत कलश शामिल हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह आस्था स्थल अपनी विशिष्ट पूजा परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के लिए जाना जाता है। माता लोल्लर दाई का दरबार घने जंगल के बीच स्थित है। यहां की खासियत यह है कि श्रद्धालु खुले वन में विराजमान माता की पूजा करते हैं। स्थानीय पतीलाल कुंजम, मोहित यादव समेत अन्य लोगों के अनुसार, माता को प्राचीन काल से वनदेवी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्र के दौरान भक्त नारियल अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं।
2003 में स्थापित हुई प्रतिमा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, माता लोल्लर दाई की पूजा इस स्थान पर प्राचीन समय से होती आ रही है। वर्ष 2003 में समिति के गठन के बाद यहां माता की प्रतिमा स्थापित की गई। पुजारी से जुड़ी मान्यता है कि माता ने स्वप्न में अपना स्वरूप स्थापित करने का संकेत दिया था। इससे पहले श्रद्धालु उनके अदृश्य स्वरूप की आराधना करते थे। माता के नाम और स्थान को लेकर भी लोककथा प्रचलित है। मान्यता है कि माता सिहावा पहाड़ से लुढ़कते हुए बरारी तक पहुंचीं। कथा के अनुसार, सप्तऋषियों ने उन्हें इसी स्थान पर विराजने का आग्रह किया था। तभी से यह वन क्षेत्र माता के दरबार के रूप में पूजित है।
चैत्र नवरात्र में लगता है मेला
ग्रामीणों के अनुसार, माता लोल्लर दाई आसपास के 11 गांवों की आराध्य देवी हैं। चैत्र नवरात्र में यहां विशेष मेला लगता है। परंपरा के अनुसार, नवरात्र के दसवें दिन इन गांवों के देवी-देवताओं को भी माता के दरबार में लाया जाता है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। स्थानीय श्रद्धालु भगवतराम देवांगन बताते हैं कि वे करीब 20 वर्षों से माता के दर्शन के लिए आ रहे हैं। भक्तों के बीच माता से जुड़ी मनोकामनाओं और चमत्कारों की कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं मान्यताओं के कारण यह स्थान क्षेत्र के लोगों की आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। शारदीय नवरात्र में प्रज्वलित ज्योति कलश और दर्शन के लिए पहुंचते श्रद्धालु बरारी के इस वनस्थल को इन दिनों भक्ति के रंग में रंग रहे हैं।

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