दुर्गेश साहू धमतरी। बीते दिनों लगातार हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव ने जलनिकासी व्यवस्था की कमियां सामने ला दीं। कई रिहायशी इलाकों में सड़क और घरों तक पानी पहुंचा, जबकि कुछ वार्डों में बारिश थमने के बाद भी कई दिनों तक पानी जमा रहा। स्थानीय गीताराम सिन्हा, हर्ष मरकाम, घनश्याम साहू सहित अन्य लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि दशकों बाद शहर में ऐसी स्थिति देखने को मिली। जलभराव के बाद स्थानीय लोगों ने प्लाटिंग और निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में जमीन विकसित कर मकान तो बना दिए गए, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त नाली या रास्ता नहीं छोड़ा गया। कुछ जगह प्राकृतिक जलप्रवाह प्रभावित होने की बात भी कही जा रही है। लोगों के मुताबिक तेज बारिश में इसका असर साफ दिखाई देता है। हालांकि इन दावों की तकनीकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
सवाल था कार्रवाई का, जवाब ड्रेनेज पर
इसी मुद्दे पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से पूछा गया कि लोगों का आरोप है कि अवैध प्लाटिंग और वहां हुए निर्माण से पानी की निकासी प्रभावित हुई। ऐसे मामलों में प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?कलेक्टर ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में समस्या है, लेकिन शहर की मूल समस्या प्लाटिंग से ज्यादा ड्रेनेज सिस्टम का ठीक नहीं होना है। उन्होंने बताया कि पहले जिस दिशा से पानी निकलता था, हाईवे और बाईपास बनने के बाद वहां भी निकासी की समस्या बनी है। शहर के लिए बड़ा ड्रेनेज एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है और आगे बनने वाली सड़कों के साथ ड्रेनेज की व्यवस्था की जाएगी।
प्लाटिंग पर कार्रवाई का जवाब अब भी साफ नहीं
कलेक्टर के जवाब में ड्रेनेज सुधार की योजना सामने आई, लेकिन अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। यही सवाल अब सबसे अहम है। जिन क्षेत्रों में बिना पर्याप्त जलनिकासी के प्लाटिंग और निर्माण की शिकायतें हैं, वहां स्वीकृत ले-आउट और मौके की स्थिति का मिलान कब होगा? यदि जांच में प्राकृतिक जलप्रवाह रोकने, नियमों के विपरीत प्लाटिंग या निर्माण की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। केवल नया ड्रेनेज बनाने से उन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा कि पानी का रास्ता आखिर किसने और कैसे बदला। हाईवे और बाईपास से निकासी प्रभावित होने की बात प्रशासन ने कही है तो उसके तकनीकी कारण भी सामने आने चाहिए। साथ ही जिन प्लाटिंग क्षेत्रों को लेकर शिकायतें हैं, वहां भी जांच जरूरी है। बारिश ने शहर में पानी ही नहीं भराया, बल्कि प्लाटिंग और जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सतह पर ला दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ ड्रेनेज का एस्टीमेट बनाता है या पानी के प्राकृतिक रास्तों को प्रभावित करने वाली प्लाटिंग पर भी रिकॉर्ड खंगालकर कार्रवाई तक पहुंचता है।
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