दुर्गेश साहू। धमतरी जिला पंचायत के CEO के इस्तेमाल में आने वाली छत्तीसगढ़ शासन की सीजी-05 AT 3760 नंबर की सरकारी गाड़ी मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर स्थित मायरा सराय में खड़ी दिखाई दी। सरकारी वाहन के दूसरे राज्य में स्थित निजी रिसॉर्ट तक पहुंचने की तस्वीर सामने आने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गाड़ी वहां किस उद्देश्य से पहुंची थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि यह आधिकारिक दौरा था तो दौरे का उद्देश्य, अनुमति और संबंधित सरकारी अभिलेखों में इसकी प्रविष्टि क्या है, यह सामने आना चाहिए। वहीं यदि वाहन निजी यात्रा के लिए इस्तेमाल हुआ है तो सरकारी वाहन के उपयोग और उससे जुड़े खर्च को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। सरकारी वाहन का ईंधन, रखरखाव और संचालन सार्वजनिक धन से होता है। ऐसे में उसका उपयोग कहां और किस काम के लिए हुआ, इसका रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वाहन की लॉगबुक, ईंधन पर्ची, यात्रा अनुमति और चालक की ड्यूटी की जांच से यह साफ हो सकता है कि वाहन धमतरी से बैहर कब और किस प्रयोजन से गया था।

                     लाल बत्ती को लेकर भी सवाल
सामने आई तस्वीर में सरकारी वाहन पर लाल बत्ती भी दिखाई दे रही है। ऐसे में वाहन के दूसरे राज्य में इस तरह इस्तेमाल और लाल बत्ती के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। हालांकि केवल तस्वीर के आधार पर किसी नियम उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और जांच से ही हो सकती है।

               CEO से पूछा सवाल, नहीं आया पक्ष
मामले को लेकर जिला पंचायत CEO जयंत नाहटा से सवाल किया गया तो उन्होंने थोड़ी देर में जानकारी देने की बात कही। हालांकि खबर लिखे जाने तक इस संबंध में उनका पक्ष सामने नहीं आया। फिलहाल सवाल सीधा है कि छत्तीसगढ़ शासन की सरकारी गाड़ी मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर स्थित मायरा सराय तक किस काम से पहुंची और इस यात्रा की अनुमति किस आधार पर मिली। यदि यह सरकारी दौरा था तो उसका उद्देश्य और अभिलेख सामने आने चाहिए, ताकि तस्वीर से उठे सवालों का स्पष्ट जवाब मिल सके।